अहमदाबाद न्यूज डेस्क: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की शिंदे कॉलोनी में रहने वाले 48 वर्षीय विजय जायसवाल ने मृत्यु के बाद भी मानवता की मिसाल कायम की। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था, लेकिन उन्होंने साहस दिखाते हुए अंगदान का फैसला लिया, जिससे कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सका।
विजय जायसवाल का हृदय अहमदाबाद भेजा गया, जबकि लिवर, दोनों किडनी और आंत को इंदौर के अस्पतालों में प्रत्यारोपण के लिए पहुंचाया गया। अंगों को समय पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए इंदौर में दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। तेज और व्यवस्थित समन्वय के कारण अलग-अलग शहरों में मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिल सकी।
परिवार ने बताया कि सामाजिक संस्था मुस्कान ग्रुप और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) की प्रेरणा से उन्होंने यह फैसला लिया। पत्नी आराधना ने कहा कि उनके पति अब कई लोगों की धड़कनों में जिंदा रहेंगे। भाई विनोद जायसवाल ने समाज से अपील की कि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं। विजय जायसवाल इंदौर के 66वें अंगदाता बने।
राज्य सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने अंतिम विदाई से पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एसडीएम वीरेंद्र कटारे और एसडीओपी रोहित लखारे सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। शोक के माहौल के बीच परिवार के इस निर्णय पर गर्व की भावना भी साफ दिखाई दी। शाम को मुक्तिधाम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।